Ram Vilas Paswan का West UP से भी था ​गहरा नाता, उनके निधन के बाद लोगों में मायूसी

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन हो गया। वह 74 साल के थे। पासवान का वेस्ट यूपी की राजनीति में भी खासा दखल रहा और 1985 के लोक सभा उपचुनाव में बिजनौर से चुनाव लड़ा था और मीरा कुमार से हारे थे, लेकिन इसके बावजूद वह यहां के लोगों के सम्पर्क में रहे थे।

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बिजनौर। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान (Ram vilas Paswan) का निधन गुरुवार की रात हो गया। वह 74 वर्ष के थे। वह कुछ दिनों से बीमार थे। पासवान पांच दशक से राजनीति में सक्रिय थे। उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ट्वीट के जरिए पिता के निधन की जानकारी दी। उनका शव ​शुक्रवार को ​नई दिल्ली से पटना ले जाया जाएगा। रामविलास पासवान वेस्ट यूपी की राजनीति (West UP Politics) से भी जुड़े रहे थे और बिजनौर से 1985 में लोक सभा उपचुनाव (Lok sabha By Election) में भी भाग्य आजमाया था। वह यह चुनाव हार गए थे, लेकिन अपनी छाप जिस तरह छोड़ी थी, उसे लोग आज भी याद करते हैं।

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1985 के लोक सभा उपचुनाव में बिजनौर से चुनाव लड़ते हुए वह कांग्रेस की मीरा कुमार से हार गए थे, हालांकि यह हार का यह अंतर काफी कम रहा। इसलिए पासवान ने लोगों के दिलों में खासी जगह बनाई थी। लोग यही कह रहे थे कि पासवान हार कर भी जीत गए। 1984 में कांग्रेस के सांसद गिरधारी लाल के निधन के बाद बिजनौर सीट रिक्त हो गई थी। 1985 में उपचुनाव हुआ। बिजनौर सुरक्षित सीट से कांग्रेस ने पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवनराम की पुत्री मीरा कुमार को मैदान में उतारा। लोकदल ने रामविलास पासवान पर दांव खेला। मीरा कुमार ने रामविलास पासवान को 5339 वोटों से हराया था। पासवान को एक लाख 22 हजार 747 वोट मिले थे, जबकि निर्दलीय चुनाव लड़ रही मायावती को 61,504 वोट ही मिल पाए थे। हार के बाद भी वह काफी समय तक बिजनौर से जुड़े रहे।

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