Panchyat election: फिर जारी हुई वार्डों की सूची, कुछ ने बांटी मिठाई तो कईयों के हाथ लगी मायूसी

मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष को तलाशनी पड़ेगी दूसरी सीट, सीमा प्रधान आ सकती है फिर से मैदान में

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meerut:कोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण सूची फिर से जारी हो चुकी है। जिला पंचायत वार्डों की सूची में कुछ के चेहरे खिल उठे तो कुछ के मायूसी भी हाथ लगी। बड़े चेहरे की बात करें तो मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविन्दर मुखिया का वार्ड अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुका है। जिसके बाद उन्हे कोई और वार्ड खोजना पड़ेगा।

ये हुआ बदलाव

जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वार्ड एक जिससे निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह चुनाव जीते थे और फिर से वहीं से तैयारी कर रहे थे, यह वार्ड इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान जिस वार्ड से चुनाव जीती थीं, वह पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित है, तो उनके लिए फिर से मौका मिल गया है। इसके अलावा वार्ड 03, 05,06, 18, 32 और 33 पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हुए हैं। इनमें वार्ड 06 से जहां जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह के खुद या उनकी पत्नी के चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है, तो वार्ड 32 से पूर्व जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान का रास्ता फिर से खुल गया है। इस बार उनके सामने चुनौती भी कम रहेगी, क्योंकि पिछली बार यह वार्ड अनारक्षित था।

दूसरी ओर वार्ड 10 से लेकर वार्ड 17 तक और वार्ड 22, 25, 28 और 31 भी अनारक्षित हो गए हैं। वार्ड वार्ड 04, 19 और 24 भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए हैं, जबकि वार्ड 07, 08 अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुए हैं। इस आरक्षण के बाद भाजपा में अंतर कलह होना साफ नजर आ रहा है। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनारक्षित है और यह मांग लगातार उठ रही है कि अनारक्षित सीट पर सामान्य जाति का ही उम्मीदवार खड़ा किया जाए, लेकिन जिस तरह का माहौल है, उससे साफ है कि पिछड़ी जाति से भी उम्मीदवार जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पर दावा करेंगे।

तैयारी की शुरु

आरक्षण सूची जारी होते ही कुछ प्रत्याशी तो तीन साल से चुनाव मैदान में थे, चुनाव के लिए लाखों रुपए भी खर्च कर चुके हैं। ऐसे प्रत्याशी तो अब घूमने का प्लान कर रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे लोगों ने सूची आते ही गांव-गांव घूमना शुरु कर दिया है। ऐसे में वे उन प्रत्याशियों का भी समर्थन जुटाने में ऐडी-चौटी का जोर लगा रहे थे, जिन्होने काफी दिनों से मेहनत के बाद समर्थन हांसिल किया था।

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