meerut: डेढ़ साल की बच्ची को लगेगा 22 करोड़ का इंजेक्शन, पिता की अपील सोशल मीडिया पर कर रही ट्रेंड

मेरठ की कालोनी ब्रह्मपुरी निवासी ईशानी का दिल्ली के एम्स में चल रहा इलाज

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meerut: क्या कभी कोई सोच सकता है कि किसी बीमारी का इतना महंगा भी इंजेक्शन होगा। जी हां मेरठ में रहने वाली महज डेढ़ साल की ईशानी नामक बच्ची को ऐसी बीमारी है जिसके इंजेक्शन की कीमत 22 करोड़ रुपए है। पिता ईतनी बड़ी रकम वहन नहीं कर सकते तो सोशल मीडिया पर लोगों से मदद की गुहार लगाई है। पिता की अपील सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।

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किस बीमारी का है इंजेक्शन

बीमार बच्ची ईशानी के पिता अभिषेक एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। ईशानी का इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है। अभिषेक ने बताया कि उनकी बेटी ईशानी को स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी नामक बीमारी है। जिसे ठीक करने के लिए उसे 22 करोड का एक इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। चुंकि वह इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सकता इसलिए उसने सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाई है। मेरठ की ब्रह्मपुरी निवासी अभिषेक ने बताया कि ईशानी का जन्म 27 अगस्त 2019 को हुआ था।  जन्म के बाद सात से आठ महीने तक ईशानी एक सामान्य बच्चे की तरह थी, लेकिन इसके बाद उसके पैर धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगे। अब उसकी उम्र डेढ़ साल है। इस समय पैर बिल्कुल भी काम नहीं करता है। थोड़ी सी हरकत पैरों के पंजों में है। इस बीमारी का असर इशानी के हाथों पर पड़ने लग गया है। सीधा हाथ बहुत कम हिल पाता है।

क्या बताते हैं ईशानी के पिता

ईशानी के पिता अभिषेक ने बताया कि वह 26 दिसंबर को एम्स गए थे। लेकिन जुलाई तक इंतजार करने को कहा गया था। इसके बाद वह ईशानी को गंगाराम अस्पताल गए। 26 दिसंबर को उसने अपना ब्लड सैंपल दिया। यह रिपोर्ट 12 जनवरी को आई और डॉक्टरों ने ”स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी” के स्टेज 2 की पुष्टि की। ईशानी के पिता ने बताया कि दुनिया में इस बीमारी की सिर्फ एक दवा है, जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये है। फंड जुटाने के लिए मिलाप और उन्होंने इंपेक्ट गुरु का सहारा लिया।अभिषेक ने बताया है कि स्विटजरलैंड की कंपनी ”नोवार्टिस जोलगेन्स्मा” इंजेक्शन तैयार करती है। इसकी कीमत 16 करोड़़ है। साथ में 8 करोड़ का टैक्स भी लगेगा। नोवार्टिस कंपनी दुनियाभर के 50 लोगों को यह दवाई मुफ्त में देती है, लेकिन वह रेंडमली सेलेक्टेड मरीजों को ही मिलती है। लेकिन उसके लिए इंतजार करना बेटी की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। यही सब सोचकर उन्होने सोशल मीडिया का सहारा लेकर मदद की गुहार लगाई है।

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