Muzaffarnagar: कोर्ट में 7 साल बाद किशोरी लाल को न्याय, पत्नी से मिलेगा गुजारा भत्ता, जानिए पूरा मामला

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने पत्नी से अपने अपने ​पति को एक हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता के रूप में देने का आदेश दिया है। 2013 में पति-पत्नी के अलग होने के बाद पति किशोरी लाल सोनकर ने पत्नी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायिर की थी।

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मुजफ्फरनगर। Muzaffarnagar News, खतौली के किशोरी लाल सोनकर और कानपुर की मुन्नी देवी की शादी 1990 में हुई थी। किशोरी लाल बेरोजगार थे तो मुन्नी देवी कानपुर में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत थी। दोनों के बीच मनमुटाव हुआ तो अलग-अलग हो गए। इसके बाद किशोरी लाल कानुपर से आकर खतौली रहने लगे। इसके कुछ महीनों बाद मुन्नी देवी रिटायर्ड हो गई थी। 2013 में किशोरी लाल ने कोर्ट में पत्नी से उन्हें गुजारा भत्ता दिलाने की याचिका दा​यर की थी। पति की याचिका पर परिवार न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर पत्नी को एक हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।

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जनपद के खतौली के नागर कॉलोनी के किशोरी लाल सोनकर का विवाह 1990 में कानपुर निवासी मुन्नी देवी के साथ हुआ था। मुन्नी देवी कानपुर स्थित रक्षा अनुसंधान विकास संगठन में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत थी। 1999 में दोनों के बीच मनमुटाव होने पर किशोरी लाल खतौली लौट आए थे। कुछ माह पूर्व मुन्नी देवी भी नौकरी से सेवानिवृत्त हो गई। वर्ष 2013 में बेरोजगार किशोरी लाल ने परिवार न्यायालय दो में प्रार्थना पत्र देकर नौकरी पेशा पत्नी मुन्नी देवी से गुजारा भत्ता का भुगतान कराने की गुहार लगाई थी। सात साल तक चली सुनवाई के बाद परिवार न्यायालय- दो की न्यायाधीश तृप्ता चौधरी ने आदेश जारी किया कि मुन्नी देवी प्राप्त होने वाली 12 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन की धनराशि में से गुजारा भत्ता के रूप में एक हजार रुपये प्रति माह का भुगतान पति किशोरीलाल को करें।

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फैसले से नाखुश किशोरी लाल का कहना है कि एक हजार रुपये से उनका कुछ होने वाला नहीं है। वह कोर्ट से मांग करेंगे कि गुजारा भत्ता की धनराशि 2013 से ही दिलाई जाए। किशोरी लाल ने बताया कि उनकी पत्नी मुन्नी देवी ने कानपुर के कोर्ट में उनके विरुद्ध झूठा मुकदमा दायर किया था। जिसमें उसने उन पर दूध में जहर मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया था। लेकिन कोर्ट ने सुनवाई कर उन्हें बरी कर दिया था। किशोरी लाल का कहना है कि उनकी पत्नी रोजगार पर थी और वह घर का काम संभालते थे। पत्नी से अलग होने के बाद उन्हें रोटी के भी लाले पड़ गए थे। मजबूर होकर उन्हें चाय की दुकान खोल कर ही पेट पालना पड़ा।

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