आखिर कहां से आते हैं आबादी वाले क्षेत्र में जंगली जानवर, Bijnor में अभी भी बना गुलदार का खौफ

मेरठ सहित पूरे वेस्ट यूपी में 7 फीसदी से भी कम रह गया वन्य क्षेत्र, जंगल खत्म होने से लोगों के बीच आ रहे जंगली जानवर

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Meerut: इन दिनों वेस्ट यूपी के जिला बिजनौर में गुलदार के खौफ से लोग अपने घरों में कैद हो रहे हैं। पिछले दिनों गुलदार ने गांव में एक बछिया को अपना निवाला बना लिया था। इसके बाद भी लोगों ने आबादी के नजदीक गुलदार को देखा, जिससे संबंधित क्षेत्र के लोग खौफ के साये में जीवन जी रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर गुलदार और तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों में आते क्यों हैं। आबादी वाले क्षेत्र में जंगली जानवरों के घुस आने पर यूपी लाइव न्यूज की खास पड़ताल जिसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे।

Bijnor में गुलदार का खौफ, बछिया बनीं शिकार, वन विभाग की टीम ने डाला डेरा

जंगलों पर भूमाफिया का कब्जा

प्रदेश की सबसे बड़ी 2073 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर फैली हस्तिनापुर सेंचुरी भी दिन-प्रतिदिन भू-माफिया की भेट चढ़ती गई। चंदन और सागौन के लाखों पेड़ काट दिए गए। विकास के नाम पर गत एक दशक में लगभग 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की बली दे गई है। जबकि इनकी प्रतिपूर्ती में 100 पौधे भी नहीं लगाए गए। मेरठ सहित वेस्ट यूपी आरा मशीनों पर रोजाना हजारों कुंतल लकड़ियों को हलाल कर दिया जाता है। पिछले कई माह में वन विभाग के अधिकारियों ने एक भी आरामशीन का निरिक्षण नहीं किया। जिसके कारण जंगलों में रहने वाले जानवरों को मैदानी इलाकों में आना पड़ रहा है।

सेंचुरी का बिगड़ा भूगोल

वर्ष 1986 में जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक मेरठ, मुज्जफरनगर, बिजनौर को छूती सेंचुरी में सिर्फ 220 वर्ग किमी क्षेत्र पर ही घना जंगल बचा है। जिसमें बिजनोर का सर्वाधिक क्षेत्रफल है।  इतना ही क्षेत्रफल सरकारी जमीनों का भी है। लगातार विकास की आड़ में जंगलों का दोहन हो रहा है। जिसके चलते वन्य जीवों को गांव और शहर की तरफ रुख करना पड़ रहा है। पिछलों दिनों मेरठ में तेंदुए ने कई दिनों तक शहर में लोगों को डराया था। हालाकि वन विभाग की टीम ने बाद में उसे पकड़ लिया था। इस सबंध में जिला वन अधिकारी का कहना है कि वास्तव में धीरे-धीरे वन कम होते जा रहे हैं। जानवरों का आबादी में आने का यह भी एक कारण है। इस बार पेड़ों का लक्ष्य पूरा करने पर भी जोर दिया जाएगा।

 

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