कृषि कानून किसान विरोधी, रालोद लड़ेगा अन्नदाता की लड़ाई: जयंत

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नई दिल्ली। कृषि सुधार कानूनों के विरोध में सुलगे किसानों के सुर के चलते उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति भी मजबूत हो चली है। किसान नेताओं को साफ पता चल चुका है कि हाल ही में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से लेकर आगामी विधानसभा चुनाव तक की धुरी किसानों के ही इर्द-गिर्द रहने वाली है। यही वजह है कि कांग्रेस, सपा और रालोद समेत सभी विपक्षी दल किसान पंचायत करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में शनिवार को राष्ट्रीय लोकदल ने मवाना के भीष्म नगर भैंसा गांव में किसान महापंचायत की। महापंचायत को रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा।

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कृषि सुधार कानूनों को किसान विरोधी

रालोद नेता जयंत चौधरी ने नए कृषि सुधार कानूनों को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया था, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसानों की आमदनी आधी से भी कम रह गई है। किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। रालोद नेता ने कहा कि कर्ज के बोझ में दबे किसान आत्महत्या का मजबूर हो रहे हैं और बाकि की रही सही कसर मोदी सरकार ने कृषि कानून लाकर कर दी है। जयंत चौधरी ने कहा कि उनके दादा चरण सिंह से लेकर अब तक रालोद ने किसानों के हक की लड़ाई लड़ी है।

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केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा

उधर, महापंचायत को संबोधित कर रहे रालोद केे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने भी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों का आय दोगुनी करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में पिछले तीन साल से गन्ने के दामों में एक रुपए की भी बढोतरी नहीं हो पाई है। इस दौरान रालोद नेता राम मेहर सिंह, यशवीर सिंह, सुनील रोहटा, राजकुमार सांगवान आदि नेताओं ने पंचायत को संबाधित किया।

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