6 महीने बाद आज से खुलने जा रहे धार्मिक स्थल, इन कड़ी शर्तों के बगैर नहीं कर सकेंगे प्रवेश

कोरोना संक्रमण के दौर में जिला प्रशासन ने मेरठ में धार्मिक स्थलों को मंगलवार से खोलने का निर्णय लिया है। धार्मिक स्थलों में प्रवेश के लिए कड़ी शर्तें माननी होंगी। प्रशासन और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन ने इसकी तैयारी कर ली है।

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मेरठ। करीब छह महीने बाद आखिर मेरठ जनपद में वह दिन आ ही गया, जब लोग धार्मिक स्थलों में प्रवेश पा सकेंगे। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च कोरोना संक्रमण के कारण करीब छह महीने से बंद हैं। ऐसे में आस्थावानों को अपने घर पर ही अपने भगवान को याद किया और पूजा-अर्चना की। जिला प्रशासन ने अब कई शर्तों के साथ धार्मिक स्थल मंगलवार से खोलने का निर्णय लिया है। इससे हर धर्म के लोगों में उत्साह है और उन्होंने खुशी जाहिर की है। ये बात अलग है कि पिछले 24 घंटे में मेरठ जनपद में कोरोना के 368 नए मरीज मिले हैं। धार्मिक स्थलों में प्रवेश के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखने की चेतावनी भी दी गई है। कैंट स्थित श्री औघड़नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीधर त्रिपाठी का कहना है कि ​भक्त मंदिरों में घंटे नहीं बजा पाएंगे। मंदिरों में प्रसाद लाने की अनुमति नहीं होगी। सभी पुजारी मास्क पहनेंगे। भक्तों को मास्क और दस्ताने पहनने के बाद ही मंदिरों में प्रवेश दिया जाएगा।

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इन नियमों को मानने के बाद मिलेगा प्रवेश
— मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, प्रसाद लाने पर प्रतिबंध।
— एक बार में 100 से ज्यादा लोगों के आने की अनुमति नहीं होगी।
— पुजारियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर होगी।
— धार्मिक स्थलों में ​चार से पांच बार सैनिटाइज कराया जाएगा।
— धर्मस्थल पर सभी लोग फेस मास्क और फेस कवर का प्रयोग करेंगे।
— सोशल डिस्टेंसिंग की दूरी धार्मिक स्थलों में ​छह फीट की होगी।
— धर्मस्थल में प्रवेश करते समय हाथ सैनिटाइज करने होंगे।
— जूते—चप्पल वाहन में उतारकर ही धर्मस्थल तक पहुंचना होगा।
— धर्मस्थलों पर एसी का तापमान 24 से 30 डिग्री के बीच रखना होगा।
— परिसर के बाहर वाहन पार्किंग में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होगा।
— धार्मिक स्थलों में प्रवेश और निकास द्वार अलग-अलग होंगे।
— मूर्ति और धर्मग्रंथ छूने की भक्तों को इजाजत नहीं होगी।
— धार्मिक सभाएं और मंडली आदि प्रतिबंधित रहेंगी।
— धर्मस्थलों में रिकार्ड धार्मिक गीत ही चला सकेंगे।
— प्रसाद वितरण और जल का छिड़काव नहीं किया जाएगा।

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