मांग: Outsource पर सफाई सुपरवाइजर रखे Nagar Nigam, मूल पदों पर भेजे जाएं सहायक सफाई नायक

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मेरठ। मेरठ नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की सहायक सफाई नायकों के पदों पर अवैध नियुक्ति का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब नगर आयुक्त मनीष बंसल से सहायक सफाई नायकों को उनके मूल पदों पर भेजने और उनके स्थान पर आउटसोर्सिंग कंपनी के सुपरवाइजर रखने ​की मांग की गई है। समाज सेवी पंकज चिण्डालिया ने मंगलवार को शिकायत पत्र के माध्यम से नगर आयुक्त से कहा कि नगर निगम मे दो ठेकेदारो ( राधा कृष्ण और कीर्ति ) द्वारा सफाई कर्मचारियों का काम करवाया जा रहा है। इस संबंध में कर्मचारियों को सभी सुविधाएं भी कंपनी की ओर से ही दी जाती है।

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मेरठ की सफाई व्यवस्था बिगड़ने से बच जायेगी

पत्र में कहा गया कि अगर ठेकेदारो/कम्पनी के कर्मचारियों से ही सुपर वाइजर का भी काम लिया जाए तो मेरठ महानगर की सफाई व्यवस्था बिगड़ने से बच जायेगी। क्योंकि नगर निगम द्वारा अवैध तरीके से बनाए गए सैंकडो सहायक सफाई नायकों की बीट खाली पड़ी रहने के कारण वहां सफाई व्यवस्था चौपट पड़ी रहती है। ऐसे में कंपनी के ही सुपरवाइजर रखे जाने के बाद ये सहायक सफाई नायक अपने मूल पदों पर लौट जाएंगे, जिससे सफाई व्यवस्था पुन: पटरी पर आ जाएगी। पत्र में यह कहा गया कि आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी कम वेतन में अधिक काम करते हैं, जबकि निगम के सहायक सफाई नायक अधिक वेतन पाकर भी सफाई व्यवस्था की अनदेखी करते हैं।

ये हैं तथ्य—

नगर निगम में कुल वार्ड- 90

-नगर निगम में आउटसोर्स पर कर्मचारी लगभग 2400
इन कर्मचारियों का वेतन लगभग 12 हजार, हाथ में 9 हजार

-नगर निगम में सरकारी सफाई कर्मचारी लगभग 800
इन कर्मचारियों का वेतन लगभग 40 से 50 हजार रुपए

-नगर निगम में सहायक सफाई नायकों की संख्या लगभग 180
-नगर नगम में सफाई नायकों की संख्या लगभग 28

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सहायक सफाई नायकों को रखने का नहीं कोई नियम

आपको बता दें कि नगर निगम में गलत तरीके से सहायक सफाई नायक का पद बना दिया गया है। जबकि न तो इस पद को शासन मानता है और खुद हाईकोर्ट पर इस पद को खारिज कर चुका है। बावजूद इसके बिना किसी नियम व आधार कर नगर निगम में लगभग 180 सफाई कर्मचारियों को कार्यवाहक सफाई कर्मचारी बना दिया गया है। जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ता है। क्योंकि बड़ी संख्या में बनाए गए ये कार्यवाहक सफाई नायक अन्य कर्मचारियों की देखरेख के बहाने अपनी बीटों की अनदेखी करते हैं, जिसके चलते वहां सफाई व्यवस्था चरमरा जाती है। खुद नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजेन्द्र सिंह भी सहायक सफाई नायक से जुड़ी व्यवस्था को गलत बता चुके हैं। उनका कहना है कि नगर निगम ने यह खुद की व्यवस्था बना डाली है, जिसका कोई आधार नहीं है।

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क्या होगा फायदा—

नगर निगम में फिलहाल 2400 सफाई कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है। अगर सुपरवाइजर भी कंपनी की ओर से रखे जाते हैं तो इन सहायक सफाई नायकों को इनके मूल पदों पर भेजा जा सकेगा। जिसकी वजहे लगभग 180 बीटों पर चरमराई सफाई व्यवस्था को पुन: पटरी पर लाया जा सकता है। इसके साथ ही नगर निगम को भी कम वेतन में सहायक सफाई नायकों का विकल्प मिल सकता है।

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