CCSU Meerut: एमबीबीएस की कॉपी बदलने के प्रकरण में अब डिप्टी रजिस्ट्रार पर बड़ी कार्रवाई

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के एमबीबीएस की कॉपी बदलने के घोटाले में कुलपति ने डिप्टी रजिस्ट्रार पर कार्रवाई की है और दो कमेटी गठित की है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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मेरठ। बहुचर्चित एमबीबीएस की कॉपियां बदलकर छात्रों को पास कराने के घोटाले में अब बड़ी कार्रवाई ​चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन ने की है। गोपनीय विभाग के प्रभारी डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव को निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि पूरा प्रकरण सामने आने के बाद भी आरोपी एमबीबीएस छात्रों के रिजल्ट नहीं रोके और उन्होंने परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। डिप्टी रजिस्ट्रार से इस संबंध में लिखित जवाब मांगा गया था, लेकिन समुचित जवाब नहीं देने पर ​उन्हें हटा दिया गया है और कमेटी बनाकर जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में की गई सभी कार्रवाइयों को शासन के संज्ञान के लिए भेजा गया है।

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करीब दो साल पहले एसटीएफ की टीम ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की परीक्षा में एमबीबीएस की कॉपियां बदलकर पास कराने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया था। इसमें ​कविराज नाम के छात्र नेता व कर्मचारी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। एसटीएफ विश्वविद्यालय के 8 कर्मचारियों को जेल भेज चुकी है। साथ ही कॉपी बदलवाने के आरोपी एमबीबीएस के दो छात्र स्वर्णजीत और आयुष भी सलाखों के पीछे भेजे गए। हद तो तब हो गई जब छात्रों ने जेल से बाहर आने के बाद उनके उत्तीर्ण होने का रिजल्ट भी जारी कर दिया गया। इसमें विश्ववि​द्यालय के भीतर मिलीभगत के आरोप भी लगे।

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​विश्ववि​द्यालय प्रशासन ने माना कि ये गोपनीय ​विभाग की बड़ी चूक है। सारा प्रकरण सामने के आने के बावजूद गोपनीय विभाग ने आरोपी एमबीबीएस छात्रों का रिजल्ट नहीं रोका। जांच में मामला खुलने पर चार कर्मचारियों कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी को सस्पेंड कर दिया गया था। अब रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव को कुलपति प्रो. एनके तनेजा ​द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब उचित नहीं दिए जाने पर कार्य से विरत की कार्रवाई की गई है। कुलपति दोनों मामलों में प्रति कुलपति और संकायाध्यक्ष से जांच करवा रहे हैं।

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