Duplicate NCERT Books Case: एक महीने में भाजपा नेता और उसके भतीजे के पास फटक भी नहीं पायी पुलिस, किए थे बड़े-बड़े दावे

ये यूपी पुलिस ​है। जंगलों से भी बदमाशों को रात के अंधेरे में खोज लेने और टांग में गोली मारकर सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली पुलिस करोड़ों रुपये की डुप्लीकेट एनसीईआरटी किताबों को छापने वाले आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसके ​भतीजे ​सचिन गुप्ता को एक महीने में भी गिरफ्तार नहीं कर पायी है।

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मेरठ। मेरठ के परतापुर और मुरादाबाद के गजरौला के गोदामों में डप्लीकेट एनसीईआरटी की करोड़ों रुपये की किताबें (Duplicate NCERT Books Case) बरामद किए ठीक एक महीना हो गया है। पुलिस (Meerut Police) अब भी खाली हाथ है और हाथ मल रही है। डुप्लीकेट एनसीईआरटी की किताबें छापने वाला वााला आरोपी वरिष्ठ भाजपा नेता संजीव गुप्ता (BJP Leader Sanjeev Gupta) और उसका भतीजा सचिन गुप्ता (Sachin Gupta) पुलिस को चकमा देते हुए गायब हैं। बताया ​जा रहा है कि आरोपी चाचा-भतीजा की लोकेशन मेरठ और आसपास ही है, लेकिन पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। सूत्रों की मानें तो डुप्लीकेट किताबों के गोरखधंधे में चाचा-भतीजा को पार्टी के कुछ नेताओं को समर्थन मिला हुआ है, जिसके कारण पुलिस उन्हें पकड़ने ​की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।

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21 अगस्त की शाम को एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने परतापुर के गोदाम में छापकर करीब 35 करोड़ रुपये की डुप्लीकेट एनसीईआरटी की किताबें ​बरामद की गई थी। मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था और छह मशीनें बरामद की थी। इस प्रिंंटिंग प्रेस को भाजपा का महानगर उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता और उसका भतीजा सचिन गुप्ता चला रहा था। इसी दिन रात को एक बजे एसटीएफ ने गजरौला में इसी तरह का गोदाम पकड़ा था, यहां 25 करोड़ की डुप्लीकेट एनसीईआरटी की किताबें जब्त की थी। पुलिस के अनुसार गजरौला का गोदाम भी इसी भाजपा नेता का था। यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों के स्कूलों में ​इन किताबों की सप्लाई की जा रही थी। काफी आर्डर पर तो ये डुप्लीकेट किताबें भेजी भी जा चुकी थीं।

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काले अक्षरों का इतना बड़ा गोरखधंधा भाजपा नेता चल रहा था और किसी को इसकी सुगबुगाहट भी नहीं थी। उस समय के फरार भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता आज भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। एसएसपी अजय साहनी लगातार दावे करते आ रहे हैं कि दोनों आरोपियों की तलाश की जा रही है, उन्हें जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन एक महीने बाद भी पुलिस खाली हाथ है। ​बताते हैं कि आरोपी संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की लोकेशन मेरठ और आसपास मिलती रही है, इसके बावजूद दोनों नहीं पकड़े जा सके। पार्टी ने आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता को पद से हटा तो दिया है, लेकिन चाचा—भतीजा को जबरदस्त संरक्षण भी मिल रहा है। जिसके चलते पुलिस उन तक नहीं पहुंच पा रही है। पुलिस के अनुसार 2015 में भाजपा नेता संजीव गुप्ता के खिलाफ डुप्लीकेट एनसीईआरटी की किताबें छापने को लेकर रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन अपने आकाओं की बदौलत वह तब भी बच निकला था।

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