किसी बैंक में होने वाले घोटाले से ग्राहकों को सीधे क्या नुकसान होता है? खबर को पढ़कर आपको भी लग जाएगा पता

0
283

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले की खबर आपने जरूर सुनी होगी. हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने बैंक से गलत दस्तावेज के बल पर यह पैसे लेकर अपने कारोबार में लगाया और अब विदेश में जाकर बस गया है. इस तरह के बहुत से घोटाले सामने आ रहे हैं. पीएमसी बैंक, यस बैंक, आंध्रा बैंक जैसे देश के तमाम बैंक इस तरह के घोटाले से जूझ रहे हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि इस तरह के बैंक घोटाले का आप पर क्या असर पड़ता है?

बीएड प्रवेश परीक्षा में मेरठ के अजमान खान ने हासिल की आठवीं रैंकिंग

पंजाब नेशनल बैंक के देश भर में करीब 40 लाख ग्राहक हैं. अगर बैंक अपने ग्राहकों के लिए सेविंग बैंक खाते में 1000 रुपये की रकम रखना जरूरी कर देता है तो इससे उसके पास आम लोगों के 400 करोड़ रुपये सालाना जमा रहते हैं. मान लीजिये कि पहले बैंक सेविंग अकाउंट में जमा पैसे पर चार फीसदी ब्याज देता था तो उसे हर साल अपने ग्राहकों को 16 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में देने पड़ते थे. अब अगर बैंक ने ब्याज की दरें घटाकर तीन फीसदी कर दी तो उसे सिर्फ 12 करोड़ रुपये का ही ब्याज देना पड़ेगा. इस तरह ब्याज दरों में एक फीसदी की कमी कर बैंक ने साल में चार करोड़ रुपये बचा लिए.

अपने बैंक में खाता रखने वाले 40 लाख ग्राहकों को बैंक पहले डेबिट कार्ड फ्री में देता था और बैंक से होने वाले ट्रांजेक्शन से लिए आने वाला एसएमएस भी फ्री था. बैंक में घोटाले की खबर आने के बाद पीएनबी ने डेबिट कार्ड के लिए 120 रुपये सालाना की फीस बांध दी. इससे 40 लाख ग्राहकों से उसने हर साल 48 करोड़ रुपये वसूल लिए. इसी तर्ज पर बैंक ने हर ग्राहक से अगर ट्रांजेक्शन वाले एसएमएस भेजने के लिए हर महीने 15 रुपये की फीसद बांध दी तो एक ग्राहक से उसने साल में 180 रुपये वसूल लिए. इस तरह 40 लाख ग्राहकों से बैंक को साल में 72 करोड़ रुपये की रकम मिल गयी.दूसरे बैंक के एटीएम से पहले अनलिमिटेड ट्रांजेक्शन फ्री थे. अब बैंक में घोटाले की खबर आने के बाद बैंक ने पांच ट्रांजेक्शन के बाद 22 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का चार्ज लेना शुरू कर दिया.

Meerut: गर्मी और उमस से बढ़ी मुश्किलें, बारिश के लिए अभी तरसेंगे लोग

हम यह मान लेते हैं कि बैंक के 40 लाख ग्राहकों में से आधे या 20 लाख से पास ही एटीएम कार्ड हैं. उनमें से भी आधे या करीब 10 लाख अपने एटीएम से महीने में पांच बार या उससे कम ट्रांजेक्शन करते हैं.यदि हम यह मान लें कि बैंक के कुल ग्राहकों में से सिर्फ पांच लाख ही एटीएम से पांच बार से अधिक ट्रांजेक्शन करते हैं और यह संख्या प्रति ग्राहक महीने में सिर्फ दो बार है.मतलब पीएनबी के पांच लाख ग्राहक ही हर महीने एटीएम से अधिक ट्रांजेक्शन के लिए बैंक को शुल्क चुकाते हैं. पांच लाख ग्राहक के महीने में दो बार अधिक एटीएम ट्रांजेक्शन करने की वजह से यह रकम 10 लाख*44 रुपये हुई. यह रकम 4.40 करोड़ रुपये हुई. इस हिसाब से साल भर में बैंक ने इस तरह के ग्राहकों से करीब 52 लाख रुपये वसूल लिए.

इसके बाद बैंक ने आरबीआई के निर्देश पर फिक्स्ड डिपाजिट की दरों में कमी कर दी. पहले अगर पीएनबी में 10 लाख ग्राहक औसतन 10 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपाजिट सात साल के लिए करते थे और उस पर उन्हें दस फीसदी ब्याज मिलता था, तो बैंक को इस मद में कुल 10 अरब रुपये ब्याज के रूप में देने पड़ते थे.बैंक अब अगर लोगों को फिक्स्ड डिपाजिट पर सिर्फ सात फीसदी ब्याज दे रहा है तो उसने इस मद में सात साल में तीन अरब या 300 करोड़ रुपये बचा लिए.

इस घोटाले की वजह से बैंक घाटे में चला गया है. इसके चलते बैंक के शेयर 30 प्रतिशत तक गिर चुके हैं. इससे पीएनबी का मार्केट कैप 8,000 करोड़ रुपये तक घट गया है. पीएनबी के 43% शेयर आम लोगों के पास हैं, ऐसे में भाव गिरने से उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है. इसी तर्ज पर बैंक के कई और निवेश माध्यम भी हैं, जिनमें आम लोगों के पैसे लगे होते हैं और उन्हें इस तरह के घोटाले का नुकसान उठाना पड़ता है.अगर घोटाला किसी सरकारी बैंक में होता है तो सरकार कुछ दिनों के बाद उसके पूंजीकरण का प्रावधान करते हुए उसमें अतिरिक्त नकदी डालती है. इस वजह से जन कल्याण के लिए किये जाने वाले काम से संबंधित पैसे बैंक के पास पहुँचते हैं और इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है.

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here