बाबरी विध्वंस में आडवाणी समेत 32 आरोपी बरी, कोर्ट ने 2 हजार पन्नों का सुनाया फैसला

कुछ ही देर में फैंसला कोर्ट की वेबसाइट पर कर दिया जाएगा अपलोड़, करीब 2000 पेज का फैसला

0
204

नई दिल्ली। 28 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिर बाबरी विध्वंस का फैंसला बुधवार को देश के सामने आ ही गया। मुकदमें का विशेष जज एस के यादव ने अपने कार्यकाल का अंतिम फैंसला सुना दिया है। फैंसले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह सहित 32 आपोपियों को बरी कर दिया गया है। जिससे बीजेपी खेमें में खुशी की लहर है। विशेष जज ने कहा कि अयोध्या विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था। घटना के प्रबल साक्ष्य नही हैं।

Meerut में भाजपाइयों ने पुलिस अफसर पर लगाया ​अभद्रता का आरोप, सांसद तक पहुंची शिकायत

फैंसला लगभग 2000 पन्नों  का है। कुछ ही देर में कोर्ट की वेबसाइट पर फैेंसले को अपलोड भी कर दिया जायेगा। cbi व अभियुक्तों के वकीलों ने ही करीब साढ़े आठ सौ पेज की लिखित बहस दाखिल की है। इसके अलावा कोर्ट के सामने 351 गवाह cbi ने परीक्षित किए व 600 से अधिक दस्तावेज पेश किए।यह आकस्मिक घटना थी। विशेष जज एसके यादव ने कहा कि घटना के प्रबल साक्ष्य नही हैं। जज नें इस दौरान अशोक सिंहल का उल्लेख कई बार किया। साक्षी महाराज के वकील प्रशांत सिंह अटल का कहना है कि cbi सुबूत देने में असफल रही है। 351 गवाह में चार्ज सिद्ध होते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। cbi का गवाह सुबूत नहीं दे पाया है। फैसला हमारे पक्ष में ही आएगा। लोगों ने स्वत: स्फूर्त प्रेरणा से ढांचा तोड दिया था। जिसमें किसी का कोई दोष नहीं था।

हाथरस गैंगरेप घटना पर भड़के अक्षय कुमार, कहा आरोपियों को फांसी दो

1992 में दर्ज हुआ था केस

6 december, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया। इस पर हिंदू और मुसलमान दोनों अपने.अपने दावे करते थे। हिंदू पक्ष का कहना रहा कि अयोध्या में ढांचे का निर्माण मुगल शासक बाबर ने वर्ष 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर कराया था, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि मस्जिद किसी मंदिर को तोडकर नहीं बनाई गई थी। मंदिर आंदोलन से जुडें संगठनों के आह्वान पर वहां बडी संख्या में कारसेवक जुटे और इस ढांचे को ध्वस्त कर दिया। इस मामले में पहली प्रथम सूचना रिपोर्ट एफआइआर उसी दिन रामजन्मभूमि थाने में दर्ज हुई। 40 ज्ञात और लाखों अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।49 आरोपितों में 32 ही जीवित छह दिसंबर,1992 को विवादित ढांचा विध्वंस के बाद इस मामले में कुल 49 प्राथमिकी दर्ज हुई थी। सभी में एक साथ विवेचना करके सीबीआइ ने 40 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। 11 जनवरी 1996 को पूरक शपथ पत्र दाखिल कर नौ के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। 49 आरोपितों में अब कुल 32 ही जीवित हैं।

 

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here