farmers protest: किसान आन्दोलन के सहारे खोई जमीन की तलाश में राजनीतिक दल, गाजीपुर बॅार्डर पर लगा विपक्ष का जमवाड़ा

कई नई पार्टियों की नजर भी 2022 के चुनाव पर, बीजेपी को हराने के लिए बन सकता है संयुक्त मोर्चा

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Gazipur border : किसान आन्दोलन अब सिर्फ किसानों का आन्दोलन नहीं रहा है, बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा राजनीतिक पार्टियाें का अपनी खोई राजनीतिक जमीन तलाशने का प्लेटफॅार्म बन गया है। कई नए दल भी इस बार उत्तर प्रदेश के 2022 में होने वाले चुनाव में हिस्सेदारी के लिए एडी-चौटी का जोर लगा रहे हैं। सभी विपक्षी  पार्टियां वेस्ट यूपी को केन्द्र बनाकर सत्ता पर काबिज होने का रोड मैप तैयार करने में जुटी हैं। अब देखना ये है कि किसान आन्दोलन किसके लिए कितना फायदेमंद साबित होगा?

दरअसल,  मार्च 2022 में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपना कार्यकाल पूर्ण कर रही है। विधानसभा चुनाव का सिर्फ एक साल ही बचा है। बीजेपी जैसे बड़े संगठन के सामने सभी विपक्षी पार्टियां बौनी साबित हो रही है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद यूपी की मुख्य पार्टियां भी हासिये पर चली गई है। वहीं इस बार आजाद समाज पार्टी व आम आदमी पार्टी भी यूपी के चुनाव में हाथ आजमाना चाहती हैं। सभी को एक मौके की तलाश थी। जिसे किसान आन्दोलन ने पूरा कर दिया।

 

किसान आन्दोलन से मिली संजीवनी

दो माह से चल रहा किसान आन्दोलन पहले राजनीति से दूर था, लेकिन गाजीपुर बॅार्डर प्रकरण के बाद अब पूरा विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी खोई जमीन की तलाश में जुट गया है। मुज्जफरनगर में हुई महापंचायत में इसकी रुप-रेखा तैयार भी कर ली गई है। आम आदमी पार्टी से लेकर रालोद व अन्य पार्टियों के नेताओं ने मंच साझा कर इसका संकेत भी दे दिया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत कह भी चुके हैं कि उन्होने चौधरी अजीत सिंह की हार को भूल बताया है। जिससे जातीय समीकरण को साधने की भी भरपूर कोशिश की जा रही है।

गाजीपुर बॅार्डर पर लगा जमवाड़ा

28 जनवरी के बाद से ही गाजीपुर बॅार्डर राजनीति का आखाड़ा बन गया है। वहां हर घंटे किसी न किसी विपक्षी पार्टी के नेताओं का जाना साफ संकेत है कि अब बिल वापसी सिर्फ नारों में रह जाएगा। कुछ नेता तो दबी जुबान से कहने भी लगे हैं कि अब आन्दोलन 2022 तक चलेगा। इसका पूरा खर्च दिल्ली सरकार व अन्य विपक्षी पार्टी उठाने को तैयार भी हैं। हालाकि किसी ने अधिकारिक रुप से इसकी पुष्टी नहीं की है। शनिवार को भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण धरना स्थल पर पहुंचे। साथ ही वेस्ट यूपी के कद्दावर सपा नेता अतुल प्रधान भी हजारों समर्थकों के साथ गाजीपुर बॅार्डर पहुंचे। इससे साफ है की किसान आन्दोलन अब पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है। विपक्षी पार्टियां सत्ता पर काबिज होने के लिए आन्दोलन का सहारा ले रही हैं।

 

 

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