मेरठ। देश में कोरोना महामारी से प्रभावित अर्थ व्यवस्था और लॉकडाउन में परिवारों की बिगड़ी माली हालत के बीच सोमवार को एक बार फिर फीस मांगने वाले स्कूलों के खिलाफ आवाज उठी। बिना पढ़ाई के फीस मांग रहे स्कूलों के खिलाफ अब अभिभावकों की ओर से लड़ाई लड़ रही सामाजिक संस्थाओं ने एकजुट होकर हो नो इंकम, नो स्कूल, नो फीस का नारा दिया। सामाजिक कार्यकर्ता रीना पटेल नेतृत्व में इकठ्ठा होकर पहुंची कई सोशल वर्कर्स और अभिभावकों ने जिलाधिकारी का घेराव कर उनको ज्ञापन भी सौंपा।

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जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए रीना पटेल ने बताया कि देश में करोना महामारी की वजह से प्रत्येक परिवार की आर्थिक स्थिति बुरी तरह से प्रभावित हुई है। आय के साधन लगभग बंद हो चुके हैं।
बावजूद इसके ऐसी संकट की घड़ी में प्राइवेट स्कूलों का दबाव अभिभावकों और छात्र-छात्राओं लगातार बढ़ता जा रहा है। रीना ने बताया कि लॉकडाउन के समय सरकार की ओर घोषणा की गई थी कि कोई भी स्कूल संचालक या स्टॉफ फीस को लेकर अभिभावकों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाएगा। लेकिन स्कूल संचालक खुलेआम सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

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स्कूल फीस के खिलाफ जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लासेज एक सिस्टम शुरू किया गया। इस बीच जब अभिभावकों ने केवल ट्यूशन फीस देने की बात कही तो तो स्कूलों ने मनमानी करते हुए सारे टैक्सेस और अन्य खर्च भी अपनी फीस में जोड़ दिए। इस पर कुछ स्कूलों ने बच्चों को एग्जाम में न बैठाने की धमकी दे डाली। ज्ञापन के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से शिक्षा के नाम पर हो रही अवैध वसूली और कालाबाजी पर रोक लगाने की मांग की।

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