प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है. बुद्धवार को हुई कैबिनेट की एक बैठक में 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया. इसके साथ ही इसका नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है.

  • नई शिक्षा नीति के तहत इसे 10+2 की बजाए 5+3+3+4 के नए फार्मूले में बांटा जायेगा. जिसमें पहले 5 वर्ष प्री प्राईमारी के 3 साल और 2 साल में कक्षा 1 और 2 को बांटा गया है. इसके बाद दूसरे 3 साल के चरण में कक्षा 3 से 5 तक की तैयारी होगी.
  • 3 साल के मध्यचरण में कक्षा 6 से 8 तक और 4 साल के माध्यमिक चरण में कक्षा 9 से 12 तक को शामिल किया गया है. इसके तहत 10वीं बॉर्ड को खत्म कर दिया गया है. इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान स्ट्रीम का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अपनी मर्जी से पाठ्यक्रम चुन सकते हैं.
  • कालेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट दूसरे साल पर डिप्लोमा और तीसरे साल पर डिग्री मिलेगी.
  • 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है. वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में मास्टर्स कर सकेंगे.
  • पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को अब एमफिल नहीं करना होगा. छात्र मास्टर्स के बाद सीधे पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे.
  • नई शिक्षा नीति में संगीत, दर्शन, कला, नृत्य, रंगमंच, उच्च संस्थानों की शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किए जायेंगे. इसके अलावा इस नीति के तहत छात्र एक कोर्स के बीच ब्रेक लेकर कोई दूसरा कोर्स कर सकता है.

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