मोबाइल से दिमाग की कोशिकाएं हो रहीं खत्म, सोते में डर कर जाग जाते हैं बच्चे!

रात को सोते समय भी नींद में बच्चें मोबाइल चला रहे होते हैं

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डॉ. सुनील सागर

मेरठ। सावधान अगर आपका बच्चा मोबाइल चला रहा ह तो उसकी खतरनाक रेडिएशन आपके बच्चों के दिमाग की सेल्स को नष्ट कर सकती है, जिसके चलते बच्चा मानसिक रोगी भी हो सकता है। रात को सोते समय भी नींद में बच्चें मोबाइल चला रहे होते हैं। बदलती जीवन शैली व फास्टफूड कल्चर के साथ मोबाइल और कम्प्यूटर ने बच्चों का चैन चुरा लिया है। देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत उनके लिए खतरनाक साबित हो रही है। मोबाइल के कारण वह पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं।

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दिमाग सही से काम न करना आदि शिकायतें

इससे बच्चों का मानसिक, सामाजिक और आर्थिक विकास प्रभावित हो रहा है। बच्चों में बढ़ती जा रही अनिद्रा की शिकायतों को देखते हुए डॉक्टर अब मोबाइल न चलाने की सलाह दे रहे हैं। इससे बच्चों में अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, नींद में डरना, दिमाग सही से काम न करना आदि शिकायतें बढ़ रही हैं। मनोचिकित्सक डॉ- विकास सैनी कहते हैं कि देर रात तक मोबाईल चलाने या कम्प्यूटर वर्क के बाद जब बच्चें सोते हैं, तो उनके दिमाग में उसी व्हाट्सप्प, फेसबुक या गेम्स के सीन चलते रहते हैं। जो वह सोने से पहले देख रहे थे। साथ ही रात में डरावनी फिल्म देर रात तक देखने पर उनके दिमाग में उसका दृश्य बन जाता है। जिससे रात में बच्चे डर जाते हैं। इससे बच्चें सोने के बाद भी आधी नींद में होते हैं। जिस कारण कई बार बच्चें सोते समय अचानक डर कर जाग जाते हैं।

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कारण ब्रेन का विकास नहीं हो पाता

सोते समय बच्चों के सपने फिल्मों के दृश्योंं पर आधारित होने लगे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ- गगन अग्रवाल ने बताया कि ज्यादा मोबाइल चलाने से ब्रेन की सेल्स मर जाती हैं, जिसके कारण ब्रेन का विकास नहीं हो पाता है। बच्चा मानसिक रोग से भी पीड़ित हो सकता है। पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे देर रात तक न जागें। लेकिन आज की बिजी लाइफ में पेरेंट्स को इतना समय नहीं मिलता कि वे रात को आकर बच्चों को देखें। थकान के कारण वह जल्दी सो जाते हैं और बच्चे देर रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं।

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