सिर्फ 3500 रुपये की पूंजी से शुरू कारोबार को हौसले ने बनाया दो करोड़ का बिजनेस

बेराजगार युवाओं के लिए मिसाल है प्रेरणा

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नई दिल्ली।  कानपुर  की प्रेरणा वर्मा को मैट्रिक की परीक्षा पास करने से पहले से ही अपने घर का खर्च चलाने के लिहाज से जॉब शुरू करना पड़ा. उनके पिता की बचपन में ही मृत्यु हो गयी थी और उनकी मां ने प्रेरणा और उनके भाई का पालन-पोषण किया था. प्रेरणा अपने भाई से बड़ी थीं, इसलिए उन्होंने घर की जिम्मेदारी उठाने के हिसाब से एक इंपोर्टर कंपनी में कम्प्यूटर ऑपरेटर की जॉब शुरू की.प्रेरणा को साल 1995-96 में हर महीने 1,200 रुपये का वेतन मिलता था.

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एक दिन प्रेरणा की मुलाकात लेदर प्रोडक्ट का बिजनेस करने वाले एक व्यक्ति से हुई. उस व्यक्ति ने प्रेरणा को लेदर प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने का ऑफर दिया. उस समय दोनों में यह बात हुई थी कि कारोबार बढ़ने के बाद मुनाफे में दोनों की हिस्सेदारी होगी.प्रेरणा को उस वक्त लेदर प्रोडक्ट के बारे में कुछ नहीं पता था. उन्हें मार्केटिंग की भी कोई समझ नहीं थी. इसके बाद भी उन्होंने बेहतर संभावनाओं के हिसाब से लेदर प्रोडक्ट की मार्केटिंग शुरू कर दी.प्रेरणा ने अपनी नई शुरुआत के बारे में कहा, “मेरा काम लोगों को लेदर प्रोडक्ट खरीदने के लिए राजी करना था.” मिलनसार स्वभाव और कड़ी मेहनत के बल पर एक महीने में ही प्रेरणा ने कई ग्राहकों को जोड़ लिया.नई पहल से उत्साहित प्रेरणा कहती हैं, “मैं लेदर प्रोडक्ट के लिए ऑर्डर लाने लगी तो मेरे पार्टनर को मुनाफा शेयर करने में दिक्कत होने लगी. इसके बाद उसका व्यवहार बदलने लगा तो मैंने उसका काम छोड़ दिया.

इसके बाद प्रेरणा काफी समय तक बेरोजगार रहीं. प्रेरणा ने कहा, “कुल मिलाकर मेरे पास करीब 3500 रुपये बचे थे. डेढ़ महीने तक लेदर प्रोडक्ट की मार्केटिंग करके यह समझ आया था कि मैं ग्राहक जोड़ सकती हूं. इसलिए मैंने कुछ ऐसा काम करने की कोशिश की जिसमें शुरू में पूंजी न लगाना पड़े और अपना काम भी शुरू हो जाए.इसके बाद प्रेरणा को लेदर प्रोडक्ट की ट्रेडिंग शुरू करने की इच्छा हुई. घर के एक कमरे को ऑफिस और पुरानी टेबल पर कम्प्यूटर बनाकर उनका ट्रेड कारोबार शुरू हो गया.

प्रेरणा ने कहा, “मैंने लेदर प्रोडक्ट की ट्रेडिंग शुरू की. लोगों की जरूरत का सामान पहुंचाने के साथ ही मार्केट घूमना और लोगों को ऑनलाइन जोड़ना शुरू कर दिया. शुरू में कारोबार में जितना खर्च था, उतनी ही कमाई हो रही थी. मैं लेदर इंडस्ट्री को समझ रही थी. कुछ क्लाइंट जुड़ने के बाद मैंने दो कमरे का ऑफिस बनाया और वहां से ट्रेडिंग होने लगी.इसके बाद धीरे-धीरे प्रेरणा का कारोबार चल निकला. पांच साल की ट्रेडिंग के बाद पुरुषों के प्रभुत्व वाले लेदर इंडस्ट्री में प्रेरणा की पहचान बनने लगी.घरेलू बाजार की बेहतर समझ विकसित होने के बाद साल 2007 में पहली बार प्रेरणा ने सामान विदेश भेजा. उन्हें एक रेफरेंस से इंग्लैंड से एक ऑर्डर मिला था. समय पर लेदर प्रोडक्ट पहुंचाने का वह आर्डर पूरा होने के बाद प्रेरणा के लेदर प्रोडक्ट बिजनेस को विस्तार मिलने लगा.प्रेरणा ने कहा, “मैं विदेश में लेदर प्रोडक्ट निर्यात करने लगी. जोखिम उठाने से मुझे कभी डर नहीं लगा.

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प्रेरणा ने कहा, “एक मशहूर कहावत है, बिना जोखिम के फायदा नहीं होता. यदि पता चलता था कि कहीं किसी काम में थोड़ा जोखिम है, लेकिन फायदा भी है तो मैं रिस्क ले लेती थी.इसके बाद साल 2010 में प्रेरणा को यूपी सरकार ने आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस के लिए अवार्ड दिया. प्रेरणा ने कहा, “यह अवार्ड मेरे लिए किसी सपने की तरह था. इससे मेरा कॉन्फिडेंस बहुत तेजी से बढ़ा और मेरा अपने बिजनेस पर फोकस और अधिक हो गया.साल 2010 में प्रेरणा ने खुद की फैक्ट्री लगाई. तब भी उन्हें बैंक से लोन नहीं मिल सका क्योंकि उन्हें कुछ गिरवी रखना था.प्रेरणा ने कहा, “फिर मैंने अपनी सारी जमा पूंजी फैक्ट्री में लगा दी और लेदर प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू कर दिया. आज 25 से ज्यादा देशों में फैशन, फुटवियर, लेदर गुड्स, हैंडीक्राफ्ट में मेरी कंपनी डील करती है. 3500 रुपये से शुरू हुआ सफर 2 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है.

प्रेरणा को प्रबंधन की पढ़ाई नहीं करने का कोई अफ़सोस नहीं है. उन्होंने कहा, “मैंने न एमबीए किया, न लेदर मार्केटिंग की ट्रेनिंग ली. मैंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन और इकनॉमिक्स में पीजी किया है. मेरी पढ़ाई भी हिंदी मीडियम में हुई है, लेकिन मुझे अपना कुछ काम करना था, इसलिए मैं यह कर पाई. मेहनत के साथ सक्सेस मिलती रही.प्रेरणा को अब एमबीए, बीटेक के छात्रों को मोटिवेट करने के लिए बुलाया जाता है, वे एक एक्सपर्ट की तरह लेक्चर देने जाती हैं.

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