देश में नजीर बन सकता है ‘पर्यावरण का चौहान मॉडल’, मांगेराम ने ASG को लिखी चिठ्ठी

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अमरोहा। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जनपद अमरोहा से निकला ‘पर्यावरण का चौहान मॉडल’ देश में एक नया आयाम स्थापित कर सकता है. इसके लिए चौहान मॉडल के जनक उप जिलाधिकारी मांगेराम चौहान ( SDM Mange Ram Chauhan ) ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (Additional Solicitors General ) को चिट्ठी लिखी है. अपनी इस चिट्ठी में मांगेराम ने सॉलिसीटर जनरल ( सुप्रीम कोर्ट ) से पर्यावरण हित में चौहान मॉडल ( Chauhan Model )  के प्रावधान देशभर में लागू किए जाने की अपील की है. मांगेराम को उम्मीद है कि अगर चौहान मॉडल को कानूनी अमलीजामा पहना दिया गया तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एतिहासिक कदम साबित होगा.

पर्यावरण सुरक्षा का ऐसे आया विचार

एएसजी को लिखे अपने पत्र में मांगेराम चौहान ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे उनके दिमाग में पर्यावरण बचाओ संबंधी विचार आया और फिर कैसे एक छोटे से प्रयास ने ही इस विचार को चौहान मॉडल तक पहुंचा दिया. पत्र में मांगेराम ने बताया कि यह 10 जून 2019 की बात है, जब वह एक दिन टीवी पर न्‍यूज देख रहे थे। तो न्यूज में बताया गया कि उस दिन पालम एयरपोर्ट का तापमान 50 डिग्री पुहंचने वाला है। ऐसा देखकर मांगेराम चिंतित हो गए और कुछ इसी कशमकश के साथ अपने कार्यालय पहुंचे।

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पर्यावरण संरक्षण की ओर पहला कदम

इस दौरान उनकी कोर्ट में मारपीट का एक केस आया। दरअसल, शांति भंग में बंद क्षेत्र के दो लोगों को उनकी कोर्ट में लाया गया। एसडीएम ने बताया कि इस मामले को देखकर उनके दिमाग में एक विचार कौंधा। उन्‍होंने दोनों लोगों को पेड़ लगाने की शर्त पर जमानत दे दी। इसके बाद एसडीएम ने बकायदा एक आदेश जारी कर दिया। इस आदेश में उन्होंने कहा कि आरोपी को 5 और जमानती को एक-एक पौधा लगाना होगा। इसका मतलब शांति भंग के एक मामले में केस से जुड़े लोगों को कम से कम 7 पौधे लगाने होंगे।

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सामने रखे तथ्य-

मांगेराम चौहान ने पत्र के माध्यम से तथ्य पेश करते हुए कहा कि उनके प्रयास से अमरोहा में अब तक 10 हजार से अधिक पौधे लगवाएं जा चुके हैं, लेकिन अगर यह मॉडल देश के सभी जिलों में लागू करा दिया जाए तो देशभर में हर साल 78 लाख पौधे केवल अभियुक्त और उनके जमानतियों के द्वारा दण्ड स्वरूप लगवाए जा सकते हैं. लेकिन इसको कानूनी लिबाज पहनाने के लिए आईपीसी की धारा 1973 की धारा 111 व 116 3 में संशोधन की जरूरत होगी. मांगेराम चौहान ने एएसजी से अपील करते हुए कहा कि अगर उनके माध्यम से भारत सरकार के सामने पर्यावरण हित में चौहान मॉडल के तथ्यों को प्रस्तुुत कर दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन किया जाए तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब तक सबसे बड़ा और प्रभावी कदम साबित होगा.

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