बिकरू में पहले विकास दुबे के कुकर्मों से डरते थे लोग और…अब उसके ‘भूत’ से, दिन ढलने पर नहीं जाते ‘उधर’

कानपुर के ​बिकरू कांड के बाद कुख्यात विकास दुबे और उसके गुर्गों का खात्मा हो गया, लेकिन यहां के ग्रामीणों में अब भी खौफ है। उनका कहना है कि विकास का भूत उन्हें परेशान करता है। एक रिपोर्ट...

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बिकरू (कानपुर)। दो जुलाई को बिकरू में आठ पुलिसकर्मियों की ​दबिश के दौरान हत्या हुई थी। विकास दुबे और उसके साथियों ने अपने घर के सामने जेसीबी से रास्ता रोककर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद विकास दुबे को पुलिस ने उज्जैन से गिरफ्तार करने के बाद वहां से आते हुए 10 जुलाई को एनकाउंटर में मार गिराया ​था। बिकरू के लोगों ने विकास दुबे की मौत के बाद घी के दीए जलाए थे और मिठाई बांटी थी। लोगों को लगा कि अब वह बेहतर तरीके से जी सकेंगे, लेकिन अब लोग विकास दुबे के नाम से फिर डरने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास दुबे का भूत उन्हें डरा रहा है। ​कुख्यात अपराधी का खंडहर हो चुका है। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उसका घर तोड़ दिया था और चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी यहां लगा दी। इसके बावजूद ग्रामीण दिन ढलने के बाद ​विकास के घर की ओर नहीं जाते, खौफ की वजह से। शहर के मुकाबले गांवों में अंधविश्वास ज्यादा है। ग्रामीणों का कहना है कि अपराधियों को क्रियाकर्म नहीं हुआ है, ऐसे में उनकी आत्मा भटक रही हैं।

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हालांकि विकास दुबे के खंडहर घर पर तैनात पुलिसकर्मी नहीं मानते कि ऐसा कुछ है, क्योंकि वे लगातार यहां ड्यूटी कर रहे हैं। दो महीने से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन ग्रामीण पुलिसकर्मियों की बातों से इत्तेफाक नहीं रखते। ग्रामीणों का कहना है कि शाम 7 बजे के बाद विकास के मोहल्ले की ओर कोई नहीं जाता। कुत्ते, बिल्ली की धमाचौकड़ी होती है। लोग किसी अनजान साए से भयभीत रहते हैं विकास की खंडहर कोठी में पत्ता भी हिलता है तो उन लोगों की रूह कांप जाती है। कई ग्रामीणों का तो कहना है कि उन्होंने विकास के भूत को देखा है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि अब जब विकास नहीं है तो अब भी अलग तरह का खौफ है। इसलिए अब भी नहीं बोलते, क्योंकि गांव में कई अकाल मौतें हुई हैं। किसी का कर्मकांड नहीं हुआ है तो उनकी आत्माएं भटक रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के घर के सामने ही 8 पुलिसकर्मियों की हत्या की गई थी। उसके घर के आसपास रहने वाले ही मुठभेड़ में मारे गए। इस नाते दिन ढलने के बाद कोई ‘उधर’ नहीं जाता।

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कानपुर पुलिस का कहना है कि हत्या में विकास और उसका पूरा गिरोह शामिल रहा। तीन जुलाई को प्रेम प्रकाश और अतुल दुबे पड़ोस के काशी नेवादा गांव में पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए। अगले दिन पुलिस ने विकास की कोठी जमींदोज कर दी। पुलिस ने मुठभेड़ में प्रभात पनकी में, प्रवीण दुबे उर्फ बऊवा इटावा में, अमर हमीरपुर में मार गिराया था। 10 जुलाई को सचेंडी में गिरोह का सरगना विकास दुबे ढेर कर दिया गया। विकास की पत्नी और प्रभात की मां ही अस्थियां लेने श्मशान गई थीं। बाकी के लावारिस में ही अंतिम संस्कार हुए हैं। इनके घरवाले अस्थियां लेने तक पहुंचे।

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