एलोवेरा की खेती से बेहतर कमाई के लिए पत्तियां नहीं, पल्प बेचिए और हो जाइए मालामाल

ऐलोवेरा की खेती के लिए सरकार से है अनुदान का प्रावधान

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नई दिल्ली। पिछले पांच-सात साल से भारत में एलोवेरा या घृतकुमारी का क्रेज बहुत बढ़ा है. सौंदर्य प्रसाधन से लेकर जूस के सीधे सेवन तक दुनिया भर में लोग एलोवेरा के चमत्कारिक गुणों को पहचान चुके हैं.एलोवेरा के नाम और इसके गुणों से आज दुनिया में लगभग हर व्यक्ति वाकिफ हो चुका है.

देश के छोटे कारोबारी, लघु उद्योग व कंपनियों से लेकर बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां एलोवेरा के प्रोडक्‍ट बेचकर करोड़ों रुपये कमा रही हैं. एलोवेरा फेस वाश, एलोवेरा फेस क्रीम, एलोवेरा शैंपू के साथ ही एलोवेरा जूस जैसे प्रोडक्ट आज कंपनियों के लिए अरबों करोड़ रुपये के कारोबार की नींव बन चुके हैं.अगर आप भी एलोवेरा का कारोबार करना चाहें तो सालाना 8-10 लाख रुपये की कमाई आराम से कर सकते हैं.

एलोवेरा या घृतकुमारी का कारोबार दो तरीके से किया जा सकता है.

अगले पांच साल तक हर साल 8-10 लाख रुपए कमा सकते हैं.दूसरा तरीका एलोवेरा की पत्तियों से पल्प निकालने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाना है. इसमें आप एलोवेरा जूस बेचकर मोटी कमाई कर सकते हैं. एलोवेरा की पत्तियों से पल्प निकालने और जूस बनाने के लिए आपको 6-7 लाख रुपये का निवेश करना पड़ सकता है. इसमें आप हर साल 20 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.

एलोवेरा की खेती के एक हेक्‍टेयर खेत के अगर हम स्टैंडर्ड मानें तो एक बार एलोवेरा के पौधे लगाने के बाद आप 3 साल तक इससे फसल ले सकते हैं. भारत सरकार और कई राज्यों के कृषि अनुसंधान केंद्र में विकसित आईसी111271, आईसी111269 और एएल-1 हाईब्रिड प्रजाति के एलोवेरा के पौधे को देश के हर क्षेत्र में उगाया जा सकता है.भारत सरकार की संस्था इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च (आईसीएआर) के अनुसार एक हेक्‍टेयर में एलोवेरा के पौधे लगाने में करीब 27,500 रुपये का खर्च आता है. इसके बाद मजदूरी, खेत तैयार करने, खाद-पानी आदि का खर्च जोड़कर पहले साल यह खर्च 50,000 रुपये पर पहुंच जाता है.

एलोवेरा की एक हेक्‍टेयर में खेती में आपको 40-45 टन पत्तियां मिलती हैं. देश की विभिन्‍न मंडियों में एलोवेरा की पत्तियों की कीमत 15,000-25,000 रुपये प्रति टन तक हो सकती है.अगर आप इस हिसाब से अपनी फसल को खेत से तोड़कर ही बेच देते हैं तो आप 8-10 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं. इसके बाद दूसरे और तीसरे साल में एक हेक्टेयर खेत से आप 60 टन तक एलोवेरा की पत्तियां निकाल सकते हैं. चौथे और पांचवें साल में पत्तियों की उपज में 20-25 फीसदी की कमी आ जाती है.

एलोवेरा की पत्तियां या तो आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनियां खरीदती हैं या कृषि मंडियों में भी इसे बेचा जा सकता है. अगर आप एलोवेरा की खेती से मोटी कमाई करना चाहते हैं तो आप 7-8 लाख रुपये लगाकर इससे जूस बनाने का कारोबार शुरू कर सकते हैं.एलोवेरा की पत्तियों से रोजाना 150 लीटर जूस तैयार करने की क्षमता वाली मशीन आपको छह-सात लाख रुपये में मिल जाती है. एलोवेरा का एक लीटर जूस बनाने में आपको 40 रुपये का खर्च आता है. यदि आप इस जूस को सीधे कंपनियों को बेचें तो आपको इसके लिए 150 रुपये प्रति लीटर तक की राशि मेल सकती है.इस हिसाब से आप रोजाना 22,500 रुपये का एलोवेरा जूस तैयार कर सकते हैं.

आयुर्वेदिक औषधि के रूप में पहचान बना चुकी एलोवेरा की कांट्रेक्ट फार्मिंग और प्री-ऑर्डर फार्मिंग आपकी निश्चित आमदनी का जरिया बन सकता है. आज के दौर में जब स्वास्थ्य के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ रही है, हर्बल प्रोडक्ट बनाने वाली पतंजलि, हिमालया, इपगा लैब, डाबर, बैद्यनाथ, झंडू आदि से आप कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग संबंधी समझौते कर सकते हैं.बहुत सी कंपनियां थर्ड पार्टी फर्म बाय बैक गारंटी के साथ कांट्रैक्ट फार्मिंग करा रही हैं. इससे किसान को फसल के बिकने की चिंता नहीं होती और वे इनकी ट्रेनिंग की मदद से एलोवेरा की बेहतर पैदावार ले सकते हैं.

डिजिटल इंडिया के इस दौर में बहुत सी वेबसाइट पर भी बायर अपनी डिमांड भेजते हैं. इनमें एक्सपोर्ट इंडिया डॉट कॉम, ई-वर्ल्ड ट्रेड फेयर डॉट कॉम, गो फोर,अली बाबा, वर्ल्ड बिजनेस आदि शामिल हैं. इन वेबसाइट पर औषधीय फसलों के बायर की डिमांड हर समय रहती है.आप अपने एक हेक्टेयर की एलोवेरा की खेती से 90 दिनों तक माल तैयार कर सकते हैं. इस अवधि के हिसाब से आप साल में 20 लाख रुपये कमा सकते हैं. आप अपने आस-पास के किसान को एलोवेरा की खेती के लिए प्रोत्साहित कर जूस बनाने की एक यूनिट भी लगा सकते हैं.

एलोवेरा जूस बनाने का प्लांट एसएमई कैटेगरी में आता है. सरकार की कई योजना ऐसी हैं जिसके तहत आप एलोवेरा जूस के बिजनेस के लिए 90 फीसदी तक लोन ले सकते हैं. भारत सरकार का खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग इस तरह का लोन देने के बाद उस पर 25 फीसदी की सब्सिडी भी देता है.इसके साथ ही आपको इस तरह के लोन पर तीन साल तक ब्याज नहीं चुकाना पड़ता है.

 

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