यूपीः मेंथा की खेती कर कम खर्च में आप भी कर सकते हैं ज्यादा कमाई, जानिए कैसे…

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यूपीःउत्तर प्रदेश के कई इलाके में आजकल मेंथा आयल की खेती किसानों के लिए संकट मोचक बन गयी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एक एकड़ में मेंथा के उत्पादन में लागत 25-30,000 रुपये आती है, जबकि किसान इससे 70-80,000 रुपये कमा सकते हैं. इस तरह एक हेक्टेयर जमीन से किसान मेंथा की खेती कर करीब 2 लाख रुपये की कमाई कर सकते हैं.

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आम तौर पर किसान अपने खेत में गेहूं या मक्का की फसल उगाते हैं. किसी दूसरी फसल के अनुपात में मेंथा की खेती से यह कमाई बहुत अधिक है. इस वजह से उत्तर-प्रदेश, बिहार समेत देश के कई राज्यों के किसान मेंथा की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं.
मेंथा आयल का यूज  और उपयोग
दवा से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट और खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल किया जाता है. भारत में हर साल मेंथा ऑयल की मांग लगातार बढ़ रही है. मेंथा आयल का निर्यात भी किया जाता है और भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है.
मेंथा की खेती का समय
यूपी, बिहार समेत देश के कई हिस्से में फरवरी से लेकर अप्रैल मध्य तक मेंथा के पौधे की रोपाई होती है. नकदी फसलों में अग्रणी मेंथा की सबसे ज्यादा खेती यूपी के बाराबंकी, चंदौली, बनारस, सीतापुर समेत कई जिलों में होती है. 90 दिनों में तैयार होने वाली मेंथा की फसल में किसान कुछ ही समय में बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
लागत भी है ज्यादा
मेंथा की खेती में लागत भी काफी ज्यादा आती है और इसकी फसल का रखरखाव भी काफी करना पड़ता है. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सीमैप लगातार मेंथा की खेती का प्रचार-प्रसार कर रही है. कई गैर सरकारी संस्थाएं भी मेंथा की प्रगतिशील खेती के लिए किसानों को प्रेरित करती हैं.
यूपी सरकार की संस्था ने विकसित किया किस्म
सीमैप ने सिम क्रांति और सिम कोसी समेत मेंथा की कई किस्म विकसित की हैं. इसकी मदद से किसान मेंथा की खेती कर अच्छी रकम कमा सकते हैं. एएसआई जैसी संस्था शुभ मिंट प्रोजेक्ट के जरिए किसानों को कम लागत में ज्यादा पैदावार निकालने के तरीके बता रही हैं.
कैसे करें मेंथा की खेती?
मेंथा की खेती में सबसे जरूरी इसकी पौध और उसकी दोबारा रोपाई होती है.
सरकारी मदद, बढ़ती जागरूकता और अच्छी कमाई की वजह से यूपी में किसानों ने बड़े पैमाने पर मेंथा की खेती का रुख किया है.
क्या रखें ध्यान
  • अच्छी किस्म की पौध और लाइन से लाइन में रोपाई
  • मेंथा को कतार में लगाना चाहिए, एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी कम से कम 45 सेंटीमीटर और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए.
  • अगर मेंथा के पौधे की रोपाई गेहूं की फसल काटने के बाद करनी है तो लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे के बीच की दूरी 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए.
किन बातों का रखें ध्यान?
मेंथा की ज्यादा फसल लेने के लिए कई बार किसान उर्वरक (डीएपी-यूरिया) का अधिक यूज करते हैं. मेंथा की फसल को डीएपी की जरूरत नहीं है, इसलिए किसानों को इस फसल मेंम सिंगल सुपर फास्फेट डालना चाहिए.
कतार में लगाने से खेत में ज्यादा पौधे लग सकते हैं, इससे आपको अधिक पैदावार मिल सकती है. बहुत से किसान मेंथा की फसल में निराई-गुड़ाई का खर्च बचाने के लिए पुआल से पौधे के बीच के खाली स्थान को ढंकना शुरू किया है.
मेंथा की उन्नत किस्मों का चुनाव कर उसकी नर्सरी लगायें.
मेंथा की नर्सरी में पौधे 3-4 इंच से ज्यादा बड़े ना हों.
मेंथा की नर्सरी छोटी क्यारी में कतार विधि से किया जाना चाहिए.
खेत में पूरब-पश्चिम दिशा में मेंथा की रोपाई करें.
मेंथा की खेती क लिए पर्याप्त जीवांश, अच्छी जल निकास वाली पी०एच० मान 6-7.5 वाली बलुई दोमट व मटियारी दोमट भूमि उपयुक्त रहती है.
खेत की अच्छी तरह से जुताई करके भूमि को समतल बनाने के बाद ही मेंथा का पौधा लगाना चाहिए.
मेंथा के पौधे की रोपाई के बाद में खेत में हल्का पानी दिया जाना चाहिए, जिससे कि मेंथा का पौधा खेत में जम जाये.
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट्स (सीमैप) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल आमदनी बढ़ने से इस साल यूपी में किसानों ने 20 फीसदी ज्यादा रकबे में मेंथा की खेती की है. इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में किसानों ने मेंथा की खेती की है.
किसान अब ठंड के मौसम में भी मेंथा के पौधे की बुआई कर सकते हैं. मेंथा की नई वेराइटी के विकसित होने से जनवरी में भी इसकी बुवाई संभव हो पाई है.
अर्ली मिंट तकनीक के आने से किसानों को काफी लाभ हुआ है. इस कृषि तकनीक से किसानों की लागत में भारी कमी आई है. एक किलोग्राम मेंथा ऑयल के उत्पादन पर किसानों को 500 रुपये की लागत आती थी, लेकिन अर्ली मिनट तकनीक के आने से लागत में करीब 200 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई है.
किसानों को इस बात का ध्यान रखना है कि आप मेंथा की खेती करने से पहले सीधे इसे खरीदने वाली कंपनियों से संपर्क करें. आजकल मेंथा आयल का ट्रेड तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए आपको बहुत से खरीदार आसानी से मिल जायेंगे.

 

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