बैंक में खाता खुलवाते समय इन बातों का रखे ध्यान, नहीं हो जाएगा भारी नुकसान

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नई दिल्लीः दिल्ली के पीतमपुरा में रहने वाली सुचेता तनेजा ने जब एक आईटी कंपनी में नई नौकरी ज्वाइन की तो उन्हें वहां दूसरे बैंक में सैलरी अकाउंट खुलवाने के लिए कहा गया. बैंक अकाउंट खोलने वाला व्यक्ति जब उनके पास फॉर्म लेकर पहुंचा तो उन्होंने पूरे फॉर्म को भरकर उस पर हस्ताक्षर करने के बजाय सिर्फ हस्ताक्षर वाले कॉलम को भर दिया और उससे कहा कि बाकी फॉर्मेलिटी वह खुद पूरी कर ले. सुचेता का बचत खाता तो खुल गया और उनकी सैलरी भी उसमें आने लगी, लेकिन बैंक ने उन्हें एक क्रेडिट कार्ड भी जारी कर दिया गया और उसके बाद उन्हें काफी दिक्कत हुई.

आप सोच रहे होंगे कि आखिर बचत खाता खुलवाने के दौरान ऐसा क्या हुआ? दरअसल बैंक में नया अकाउंट खोलने वाले फॉर्म में एक कॉलम क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए भी होता है. अगर आपने उस पर निशान नहीं लगाया तो एजेंट उसे टिक कर देता है जिसके बाद आपको बैंक क्रेडिट कार्ड जारी कर देता है. इसमें एजेंट को अकाउंट खोलने के साथ क्रेडिट कार्ड बनवाने का भी कमीशन मिल जाता है.

 

सुचेता ने स्वीकार किया कि उसने बचत खाते का फॉर्म खुद भरने की जगह फॉर्म पर हस्ताक्षर करने वाली जगहों पर अपने हस्ताक्षर करने के बाद उसे बैंक के एजेंट को सौंप दिया था.अधिकतर लोग बैंक अकाउंट खुलवाते वक्त फॉर्म भरने की जगह सिर्फ हस्ताक्षर ही कर देते हैं. आम तौर पर बैंक का एजेंट बचत खाता खुलवाने में आपकी मदद करने के लिए आपके पास आता है और आपसे कहता है कि जरूरी दस्तावेजों के साथ आप खाली फॉर्म पर अपने हस्ताक्षर कर दीजिए.

वह आपसे कहता है कि फॉर्म भरने जैसे काम वह खुद कर लेगा और आपको अपना समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है. उस समय आपको बैंक प्रतिनिधि की बातें अच्छी लगती हैं और जैसी घटना सुचेता के साथ घटी वैसी घटना होने के बाद आपको पछताना पड़ सकता है. जब कोई पढ़ा-लिखा जागरूक व्यक्ति खाली फार्म पर हस्ताक्षर कर सकता है तो और लोगों की बात ही छोडि़ए.

बचत खाता खुलवाते समय खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर कर देने के बाद न केवल अनचाहा क्रेडिट कार्ड भेज दिया जाता है बल्कि कभी-कभार तो खाता खुलवाने वाले व्यक्ति को बीमा कवर भी दे दिया जाता है जिसका प्रीमियम भी उससे लिया जाता है या फिर क्रेडिट कार्ड के पहले बिल में अनचाहे खर्च जोड़ दिए जाते हैं.अधिकतर लोग विभिन्न तरह की परेशानी की वजह से क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं करते, यही वजह है कि अनचाहा क्रेडिट कार्ड और बीमा पालिसी मिलने के बाद भी उन्हें कोई चिंता नहीं रहती.

ग्राहको द्वारा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किये जाने की वजह से बैंको को न तो सालाना शुल्क मिल पाता है और न ही बीमा प्रीमियम की राशि. ऐसे मामलों में समय बीतने के साथ ही ऐसी बकाया राशि को आम तौर पर बैंक माफ कर देते हैं. माफ की गई ऐसी राशि के संदर्भ में बैंक सिबिल को जो रिपोर्ट करते हैं उसमें ग्राहको की तरफ से पेमेंट का डिफॉल्ट दिखाया जाता है. बाद में जब ग्राहक होम लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सिबिल रिपोर्ट में दर्ज डिफॉल्ट की वजह से उनका आवेदन रद्द कर दिया जाता है.

कई लोगों ने अपनी जानकारी में लोन लेने के बाद उसे सही समय पर चुकाया है, फिर भी उनके नाम सिबिल की डिफॉल्टर लिस्ट में होते हैं. उनमें से अधिकतर लोग सिबिल की डिफॉल्टर सूची में क्रेडिट कार्ड से जुड़े मसलों की वजह से शामिल होते हैं.

बैंक के प्रतिनिधि पर भरोसा कर खाता खुलवाने की जगह खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर करने का ऐसा परिणाम भी आ सकता है. एक घर या कार खरीदने का सपना टूट जाता है. यही नहीं इससे लोन लेने वाले ग्राहकों को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे लोन का एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिए जाने के बाद डाउन पेमेंट करने के बाद बची राशि का भुगतान नहीं कर पाते. तब उन्हें पता चलता है कि खाता खुलवाना और उसके साथ क्रेडिट कार्ड बनाना उन्हें कितना महंगा पड़ रहा है.

कई बार अगर ग्राहक इस क्रेडिट कार्ड को बंद कराने या बीमा पॉलिसी को रद्द कराने की कोशिश करते हैं तो उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. एक मीडिया हाउस में काम कर रहे राजकुमार मल्होत्रा ने बताया, ‘एक निजी बैंक ने क्रेडिट कार्ड के साथ मुझे जबरन बीमा पॉलिसी दे दी. स्टेटमेंट आने के बाद जब मैंने बैंक से इस बारे में बात की तो बैंक ने कहा कि आप पेमेंट कर दीजिए, बाद में यह राशि आपके अकाउंट में वापस हो जाएगी. उस बार पेमेंट करने के बाद तीन महीने तक यह राशि वापस नहीं हुई, उल्टे बैंक ने बीमा पालिसी का प्रीमियम दोबारा क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में लगाकर भेज दिया. इस रकम को वापस पाने के लिए अब वे बैंकिंग ओम्बड्समैन के चक्कर काट रहे हैं.

बैंक के एक सीनियर मैनेजर ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘जो वास्तव में डिफॉल्टर नहीं हैं ऐसे ग्राहको की मदद के लिए मेरा सुझाव यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अकाउंट ओपनिंग फॉर्म के साथ अन्य उत्पादों की बंडलिंग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए. आरबीआई की तरफ से उठाये जाने वाला इस एक कदम से सिबिल में रिपोर्ट किए जाने वाले डिफॉल्टरों की संख्या में भारी कमी आएगी. ग्राहकों के लिए मेरा सुझाव है कि फॉर्म को पूरी तरह से भरने के बाद ही साइन करें और आपको जो प्रोडक्ट नहीं चाहिए, उसके लिए साफ़ साफ़ मना कर दें.’ उन्होंने कहा कि दूसरा कदम सिबिल और आरबीआई साथ में मिलकर उठाते हुए ऐसे अवास्तविक डिफॉल्टरों की गिनती घटा सकते हैं. उन्हें ऐसे तरीके पर काम करना चाहिए जिससे कभी इस्तेमाल न किये जाने वाले क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टर्मिनोलॉजी अलग हो.

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