पर्ची का झंझट खत्म, अब sms से गन्ना डालेंगे किसान, डिजिटल गन्ना पर्ची से होगा पर्यावरण संरक्षण

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मेरठ। देश में सर्वाधिक गन्ना उपज,चीनी उत्पादन का रिकार्ड बनाने वाला प्रदेश इस बार डिजिटल गन्ना पर्ची से पर्यावरण संरक्षण में इतिहास रचेगा। लॉकडाउन के दौरान एसएमएस गन्ना पर्ची कारगर होने के बाद अपर मुख्य सचिव गन्ना विकास एव चीनी उद्योग ने कागज पर गन्ना पर्ची की छपाई को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इससे प्रदेश प्रदेश में विभाग का करीब सवा नौ करोड बजट बचेगा साथ ही दो हजार पेड भी प्रतिवर्ष कटने से बच सकेंगे। किसानों को मोबाइल पर पर्ची मिलने से बिचौलिए का वर्चस्व भी समाप्त होगा। इसके अतिरिक्त चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करने के लिये पर्याप्त समय भी मिल जाएगा।

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गन्ना विभाग का माफियाराज दूर करने के लिये एसआरएस -सुगरकेन इंफोरमेशन सिस्टम के बाद ईआरपी -इँटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम लागू किया गया। अत्याधुनिक साफ्टवेयर वाले इस सिस्टम की मदद से ई गन्ना एप लांच किया गया। डिजिटल पर्ची के साथ कई हाईटैक सेवाएं शुरू की गयी।एसएमएस गन्ना पर्ची कारगर साबित हुई साथ ही किसानों को पर्ची खाने कव इसके इंतजार की चिंता भी खत्म हो गयी। गत पेराई सत्र में ट्रायल के रूप में शुरू डिजिटल पर्ची का प्रयोग लॉकडाउन में ४७ लाख २१ हजार गन्ना आपूतिकत्र्ता किसान के लिये वरदान साबित हुआ। अपर मुख्य सचिव ने कोविड संक्रमण से बचाव के लिये डिजिटल पर्ची पर गन्ना खरीद शुरू करा दी। इससे किसानों को राहत मिली ही साथ ही विभाग का प्रति पर्ची 1.25 रूपये का खर्च भी बचा। मेरठ में करीब 4.75 लाख से अधिक गन्ना किसान सप्लायर्स है। जिन्हें पर्ची के तहत भुगतान किया जाता है। नये आदेश से उनका समय भी बचेगा ।

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80 मेट्रिक टन बचेगा कागज

उप गन्ना आयुक्त मेरठ मंडल राजेश मिश्र का कहना है कि 7.32 करोड गन्ना पर्ची की छपाई के लिये करीब 80 से 82 मीट्रिक टन कागज के लिये 6 से 8 इंच व्यास का तथा 40 फीट की लंबाई वाले करीब 24 की जरूरत पडती है। डिजिटल गन्ना पर्ची से प्रतिवर्ष दो हजार पेड कटने से बच जाएंगे। वहीं ए फोर साईज का क ागज गन्ना पर्ची में 36,000 रिम भी काम में आने से बच जाएंगे। कोविड 19 से बचाव तथा किसानों की समय से पर्ची वितरण के लिये कागज पर गन्ना पर्ची की छपाई बंद कर दी गयी है। इससे विभाग के बजट के साथ पेड भी कटने से बचेंगे। एसएमएस गन्ना पर्ची से ही अब गन्ना खरीद होगी।

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