Meerut: डुप्लीकेट एनसीईआरटी किताबों को लेकर खुले नए राज, भाजपा नेता और उसके भतीजे पर शिकंजा

करोड़ों रुपये की डुप्लीकेट एनसीईआरटी किताबें ​छापने के आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसके भतीजे सचिन गुप्ता को पुलिस अभी तक नहीं पकड़ पायी है।

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मेरठ। करोड़ों रुपये की डुप्लीकेट एनसीईआरटी किताबें ​छापने के आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसके भतीजे सचिन गुप्ता को पुलिस अभी तक नहीं पकड़ पायी है। ​पुलिस अफसरों का दावा है कि आरोपी चाचा—भतीजे को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन दोनों आरोपियों की लोकेशन ​मेरठ और आसपास होने के बावजूद ​उनकी गिरफ्तारी नहीं होना, सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस हालांकि दोनों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के लिए नोटिस देने की तैयारी कर रही है। इसी बीच, पुलिस ने मौके पर पकड़े गए चारों आरोपियों से जेल में पूछताछ की है। इन्होंने पूछताछ में जो बातें पुलिस को बताईं, ​उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि करोड़ों के इस कारोबार में पिछले पांच साल में किस कदर नियमों को ताक पर रख दिया गया था।

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पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद सर छोटूराम इंजिनीयरिंग कॉलेज में बनाई गई अस्थाई जेल में चारों आरोपियों शिवम, राहुल, आकाश और सुनील से अलग-अलग पूछताछ की। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में किताबों की बिक्री बेतहाशा बढ़ गई थी। स्कूल खुलने से पहले दुकानदारों के आर्डर बुक किए जाते थे। उसके बाद प्रिंटिंग प्रेस से किताब छपाई के बाद सीधे दुकानदारों को भेज दी जाती थी। अपनी प्रेस के साथ—साथ अन्य प्रिंटिंग प्रेस में भी डुप्लीकेट एनसीईआरटी की किताबें छापी जाती थीं।

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एसटीएफ और परतापुर पुलिस ने संयुक्त रूप से 21 अगस्त को परतापुर और गजरौला में गोदामों पर छापा मारकर करोड़ों की किताब पकड़ी थी। मौके से पुलिस ने शिवम, राहुल, आकाश और सुनील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता, कर्मचारी विकास त्यागी और नफीस खान पुलिस पकड़ से बाहर हैं। उनके गैरजमानती वारंट भी पुलिस ले चुकी है। इंस्पेक्टर आनंद मिश्रा ने बताया कि पेपर और स्याही के बारे में भी कर्मचारियों ने पुलिस को जानकारी दी है। पूछताछ में बताया कि वाटर मार्क लगा हुआ पेपर ही छपाई के लिए आता था, जो पेपर मिल में संजीव और सचिन खुद तैयार कराते थे। पुलिस ​की पूछताछ में चारों ने बताया कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ माल उतारने की रहती थी। नफीस और विकास त्यागी ही सभी दुकानदारों के पास जाकर माल का आर्डर लाते और पैसों का हिसाब रखते थे।

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